झूठे आरोपों से नहीं, सच्चाई और समाजसेवा से जीते जाते हैं चुनाव : सत्यनारायण गुप्ता
अग्रवाल सभा के चुनाव में राजनीतिक हस्तक्षेप पर भी उठाए सवाल, कहा—सामाजिक संस्थाओं को राजनीति का अखाड़ा न बनाया जाए। गत दिवस सत कुमार जी द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जगमोहन गर्ग जी पर लगाए गए इस आरोप को सुनकर मुझे बेहद हैरानी हुई कि उन्होंने 36 वर्षों में अग्रवाल सभा को एक रुपये का भी सहयोग नहीं दिया। आखिर इससे बड़ी विडंबना क्या हो सकती है कि समाज में वर्षों से सेवा कार्य करने वाले व्यक्ति के बारे में इस तरह की बातें कही जाएँ?
मैं व्यक्तिगत रूप से जगमोहन गर्ग जी को एक ऐसे समाजसेवी के रूप में जानता हूँ, जो धरातल पर रहकर समाजहित में कार्य करते हैं। उन्हें न तो अपने नाम का प्रचार करने की भूख है और न ही किसी सम्मान की लालसा। वह समाज के लोगों के सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले व्यक्ति हैं। ऐसे व्यक्ति पर यह आरोप लगाना कि उन्होंने कभी अग्रवाल सभा के लिए कोई दान या सहयोग नहीं दिया, निश्चित रूप से गंभीर सवाल खड़े करता है।
मुझे आज कुसुम गुप्ता जी का वीडियो सुनकर अच्छा लगा, जिसमें उन्होंने जगमोहन गर्ग जी पर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया। यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में ठोस तथ्य नहीं हैं, तो चुनाव के दौरान इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है। चुनाव में जीत हासिल करने के लिए आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि काम, व्यवहार और समाज के प्रति समर्पण मायने रखता है।
मुझे एक बात और हैरान करती है। जिन अग्रवाल समाज के सम्मानित समाजसेवियों ने स्वयं जगमोहन गर्ग जी के निवास पर जाकर अपने हाथों से 11 लाख रुपये की राशि प्राप्त की थी, वे भी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मौजूद थे। यदि उनके सामने 36 वर्षों तक एक रुपये का भी सहयोग न देने की बात कही गई, तो उन्हें उसी समय तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी। यदि बयान गलत था, तो उसका खंडन करना भी उनकी सामाजिक जिम्मेदारी थी। सच्चाई को सच्चाई और गलत बात को गलत कहना ही समाज के प्रति ईमानदारी है।
राजनीतिक हस्तक्षेप पर भी उठाए सवाल
मुझे यह देखकर भी चिंता हो रही है कि अग्रवाल सभा का चुनाव अब राजनीतिक रंग लेता दिखाई दे रहा है। मैं सभी राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों और नेताओं से विनम्र आग्रह करना चाहता हूँ कि अग्रवाल सभा एक सामाजिक संस्था है, कोई राजनीतिक संगठन नहीं। इसमें किसी भी राजनीतिक विचारधारा से जुड़े व्यक्ति को चुनाव लड़ने, सहयोग करने और समाजसेवा करने का पूरा अधिकार है।
यदि कोई व्यक्ति वैश्य समाज का होने के नाते समाज के चुनाव में भाग ले रहा है, तो उसका मूल्यांकन उसके सामाजिक योगदान और कार्यों के आधार पर होना चाहिए, न कि उसकी राजनीतिक विचारधारा या किसी विशेष पार्टी से जुड़ाव के आधार पर।
चुनाव आते हैं और चले जाते हैं। राजनीतिक पार्टियाँ सत्ता में आती हैं और चली जाती हैं, लेकिन समाज हमेशा बना रहता है। सामाजिक व्यक्ति किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि पूरे समाज का होता है। इसलिए किसी एक प्रत्याशी के समर्थन में राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करना और दूसरे प्रत्याशियों की अनदेखी करना सामाजिक दृष्टि से उचित नहीं है।
मैं स्वयं संघ विचारधारा से जुड़ा रहा हूँ और भारतीय जनता पार्टी में भी पदाधिकारी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा चुका हूँ। पिछले लगभग 35 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूँ। मैंने अग्रवाल सभा के पहले भी कई चुनाव देखे हैं, लेकिन सामाजिक चुनावों में इस तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप और वातावरण बनते हुए देखकर मुझे वास्तव में आश्चर्य हो रहा है।
जहाँ तक जगमोहन गर्ग जी की टीम की जीत का सवाल है, मेरा विश्वास है कि समाज के लोग उनके कार्यों, व्यवहार और वर्षों की सेवा को ध्यान में रखकर अपना निर्णय लेंगे। चुनाव में जीत-हार अपनी जगह है, लेकिन समाज की एकता और आपसी भाईचारा उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
मेरा सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और अग्रवाल समाज के बंधुओं से एक ही आग्रह है—अग्रवाल सभा के चुनाव को राजनीति का अखाड़ा न बनाएँ। समाज को समाज की तरह चलने दें। चुनाव निष्पक्ष हों, आरोप तथ्यों के आधार पर लगें और हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का समान अवसर मिले।
क्योंकि अंततः पद किसी के पास स्थायी नहीं रहता, लेकिन समाज में व्यक्ति की पहचान उसके कर्मों, व्यवहार और समाजसेवा से ही बनती है।