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G-7 का सदस्य नहीं है भारत, फिर भी इस बड़े मंच पर PM मोदी को क्यों मिला बुलावा?

August 25, 2019 10:57 PM

जी-7 दुनिया के सात विकसित देशों का एलीट क्लब है. ये देश दुनिया की अर्थव्यवस्था की चाल और रफ्तार तय करते हैं. जी-7 के देशों का दुनिया की 40 फीसदी जीडीपी पर कब्जा है. हालांकि यहां पर मात्र 10 फीसदी आबादी निवास करती है. भारत इस वीआईपी क्लब का सदस्य नहीं है. लेकिन वैश्विक पटल पर भारत की बढ़ती ताकत का ही असर है कि इस सम्मेलन में भारत को विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थोड़ी ही देर में इस बैठक में शिरकत करने फ्रांस के बिआरिट्ज शहर पहुंच रहे हैं.

जी-7 में शामिल देश हैं कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका. 1977 से इस सम्मेलन में यूरोपियन यूनियन भी शामिल होता रहा है.

 

भारत को खास बुलावा

विदेश मंत्रालय ने कहा कि जी-7 में भारत को आमंत्रण दुनिया में एक बड़ी आर्थिक शक्ति के रूप में भारत की पहचान और फ्रांस के राष्ट्रपति के साथ भारत के प्रधानमंत्री की पर्सनल केमिस्ट्री का सबूत है. इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री वातावरण, जलवायु, समुद्री सुरक्षा और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर सेशन को संबोधित करेंगे.

बता दें कि इस वक्त फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों जी-7 के अध्यक्ष हैं. अध्यक्ष होने के नाते उन्हें गैर सदस्य देशों को इस सम्मेलन में आमंत्रित करने का अधिकार है. जी-7 की अध्यक्षता सदस्य देश करते हैं. हर सदस्य देश बारी-बारी से जी-7 की अध्यक्षता करता है. तीन दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के दौरे पर थे. यहां पर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से उनकी केमिस्ट्री मीडिया में काफी चर्चित रही थी.

दरअसल जी-7 का कोई स्थायी सचिवालय नहीं है, न ही इस संगठन का कोई कानूनी स्वरूप है. जो देश जी-7 का अध्यक्ष होता है, वही इसके कामकाज के लिए जरूरी संसाधन मुहैया कराता है और ग्रुप का एजेंडा तय करता है. फ्रांस के राष्ट्रपति ने इस बार के बैठक के लिए आर्थिक और सामाजिक असामनता और लैंगिक असमानता को मुख्य एजेंडा तय किया है.

 
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