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जल जीवन मिशन: जल प्रदूषण की समस्या का समाधान

March 26, 2021 04:47 PM
जल जीवन मिशन: जल प्रदूषण की समस्या का समाधान
पंचकूला,  26 मार्च  -- सत्यनारायण गुप्ता-  केन्द्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री श्री रतन लाल कटारिया ने सांसद श्री गिरीश भालचंद्र बापट द्वारा पूछे गए एक तारांकित प्रश्न के जवाब में उत्तर देते हुए भारत में दूषित पानी की समस्या के समाधान पर जानकारी दी। श्री कटारिया ने बताया कि केन्द्र सरकार ने आर्सेनिक और फ्लोराइड से प्रभावित 27,544 क्षेत्रों में वर्ष 2017 में राष्ट्रीय जल क्वालिटी सब मिशन (NWQSM) की शुरूआत की, जिनमें से केवल 1,369 क्षेत्रों को छोड़कर बाकी सभी में पीने योग्य पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है तथा बाकी को भी जल्द से जल्द कवर करने के लिए काम चल रहा है। श्री कटारिया ने बताया कि NWQSM के तहत अभी बचे हुए क्षेत्रों में मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल (612), पंजाब (382), राजस्थान (297), झारखंड (27) और बिहार (32) से संबंधित हैं। 
श्री कटारिया ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत जल में घुले 6 प्रदूषकों फ्लोराइड, आर्सेनिक, Salinity, Iron, Nitrate और भारी धातुओं की मॉनिटिरिंग की जाती है।  जल जीवन मिशन के अंतर्गत, गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों में पीने योग्य पानी की उपलब्धता सुनिश्चित कराना सर्वोच्च प्राथमिकताओं में हैं, जिसके लिए केन्द्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर इन क्षेत्रों में पाइप जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रयास कर रही हैं।
मंत्रालय की IMIS रिपोर्ट की जानकारी देते हुए श्री कटारिया ने बताया कि 48,169 ग्रामीण क्षेत्र इन प्रदूषकों से प्रभावित हैं, जिनमें असम 21,019 तथा राजस्थान 12,228 क्षेत्रों के साथ इस सूची में सबसे ऊपर हैं। इनके साथ ही बिहार के 3,987, ओडिसा के 3,489 और पश्चिम बंगाल के 3,114 क्षेत्र इन quality affected क्षेत्रों में शामिल हैं। जबकि असम में मुख्य रूप से 19,795 क्षेत्र उच्च आयरन से तथा 1,207 क्षेत्र आर्सेनिक जैसे प्रदूषकों से प्रभावित हैं तो वहीं राजस्थान के 10,107 क्षेत्रों में उच्च लवणता, पश्चिम बंगाल में आयरन से 1,718 तथा आर्सेनिक से 1,102 क्षेत्रों की water quality प्रभावित पायी गई है।    
श्री कटारिया ने आगे बताया कि जल जीवन मिशन केंद्र सरकार का एक महत्वपूर्ण मिशन है, जिसमें गांव, जिला स्तर पर जलापूर्ति योजनाओं को संकलित करते हुए गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाती है।  इसके अलावा ऐसे habitations के लिए वित्तीय आवंटन में 10% वेटेज दिया गया है तथा साथ ही राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को वित्तीय आवंटन का 2% पानी की गुणवत्ता निगरानी गतिविधियों के लिए उपयोग किया जा सकता है।
श्री कटारिया ने बताया कि आर्सेनिक / फ्लोराइड से प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए वहां पर Community Water Purification Plant (CWPP) बनाने की सलाह राज्य सरकारों को दी गई है। जिससे वहां 8-10 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन पीने योग्य पानी की उबलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
श्री कटारिया ने बताया कि संबंधित क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता की निगरानी के लिए जमीनी स्तर पर वहां के सामाजिक लोगों को इस मुहिम से जोड़ा जा रहा है। Field Testing Kits (FTKs) बांटी जा रही है और प्रत्येक गांव की 5 महिलाओं को इन किटों का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। अब तक 1.25 लाख गांवों में 4.7 लाख महिलाओं को water testing के लिए trained किया गया है।
श्री कटारिया ने हाल ही में लांच किए गए Water Quality Management Information System (WQMIS) के बारे में उल्लेख करते हुए बताया कि देश भर की 2000 से अधिक water quality testing labs को, आम लोगों के लिए एक पोर्टल पर सूचीबद्ध किया गया है। इसके माध्यम से अब कोई भी व्यक्ति बड़ी आसानी से निकटतम लैब का पता करके अपने क्षेत्र के पानी के नमूने को परीक्षण के लिए भेज सकते है और पानी की गुणवत्ता की रिपोर्ट ऑनलाईन प्राप्त कर सकता है। यह देश में जल परीक्षण की दिशा में एक प्रगतिशील कदम है।
श्री कटारिया ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जी के नेतृत्व में राज्य में water management में किए गए सुधारों की तारीफ करते हुए बताया कि यह माननीय मनोहर लाल खट्टर जी की दूरदर्शी सोच व कुशल नेतृत्व क्षमता का ही परिणाम है, जो हरियाणा राज्य पानी से जुड़े गंभीर मुद्दों पर लगातार लक्ष्य हासिल कर रहा है। उन्होंने बताया कि हरियाणा के पंचकुला, अंबाला, कुरूक्षेत्र, करनाल और रोहतक जिले 100% नल से जल के लक्ष्यों को पूरा कर चुके हैं। उन्होंने हरियाणा सरकार द्वारा water quality में किए गए सुधारों की तुलना पड़ोसी राज्य पंजाब से करते हुए बताया कि हरियाणा राज्य में अब मात्र 1 क्षेत्र बाकी है जहां पानी फ्लोराइड प्रदूषक से प्रभावित हैं, जबकि पंजाब के 1,113 क्षेत्रों का पानी अभी तक इन प्रदूषकों से प्रभावित है, जिनमें 210 क्षेत्र फ्लोराइड से, 605 क्षेत्र आर्सेनिक से, 34 क्षेत्र आयरन से, 59 क्षेत्र नाइट्रेट से तथा 225 क्षेत्र भारी धातुओं के प्रदूषकों से प्रभावित हैं।
 
 

 

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